Makar Sankranti Vrat Katha in Hindi 2025: मकर संक्रांति पर पढ़ें ये व्रत कथा, सूर्य के साथ शनिदेव भी होंगे प्रसन्न


 

Makar Sankranti Vrat Katha in Hindi 2025: मकर संक्रांति को लेकर कर् कथाएं प्रचलित है। जिसमें से शनि देव और सूर्य देव की सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति की व्रत कथा

Makar Sankranti 2025 : मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव के घर जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन सूर्य की काले तिल के साथ उपासना करने से व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है। इसके अलावा मकर संक्रांति के मौके पर सूर्यदेव और शनि की कथा पढ़ी जाए तो शनिदोष से काफी हद तक राहत मिलती है। तो आइए जानते है मकर संक्रांति की कथा।

मकर संक्रांति का त्योहार इस बार 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। इस दिन जप-तप व दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन किए गए दान का दोगुना फल मिलता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य शनि देव के घर आते हैं। इस दिन सूर्य शनि की राशि मकर में प्रवेश करेंगे। आपको बता दें कि पहले शनिदेव की राशि कुंभ थी। लेकिन, जब सूर्य देव शनिदेव से प्रसन्न हुए तो उन्होंने उन्हें एक और राशि यानी मकर राशि प्रदान कर दी। मकर संक्रंति के दिन सूर्यदेव और शनि की कथा पढ़ने से आप शनि दोष से काफी हद तक राहत पा सकते हैं। तो आइए जानते हैं मकर संक्रांति की कथा।

मकर संक्रांति की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव और शनिदेव में अच्छे संबंध नहीं थे। दरअसल. इसका कारण था सूर्य देव का शनि की माता छाया के प्रति उनका व्यवहार। दरअसल, शनि देव का रंग काला होने के कारण सूर्य देव ने उनके जन्म के दौरान कहा था कि ऐसा पुत्र मेरा नहीं हो सकता। इसके बाद से सूर्य देव ने शनि देव और उनकी माता छाया को अलग कर दिया था। जिस घर में वह रहते थे उसका नाम कुंभ था।


सूर्यदेव को मिला शाप

सूर्यदेव के ऐसे व्यवहार से क्रोधित होकर छाया ने उन्हें श्राप दे दिया था। माता छाया ने सूर्यदेव को कुष्ठ रोग का श्राप दिया था। जिससे क्रोधित होकर सूर्यदेव ने छाया और शनिदेव का घर जलाकर राख कर दिया था। सूर्यदेव के पुत्र यम ने सूर्य देव को उस श्राप से मुक्त किया था। साथ ही उनके सामने मांग रखी थी की वह उनकी माता यानी छाया के साथ अपने व्यवहार में बदलाव लाएं।


छाया और शनि से मिलने पहुंचे सूर्यदेव

इसके बाद सूर्यदेव छााया और शनिदेव से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे थे। जब सूर्यदेव वहा पहुंचे तो उन्होंने देखा की वहां कुछ भी नहीं था सब कुछ जलकर बर्बाद हो गया था। इसके बाद शनिदेव ने काले तिल से अपने पिता का स्वागत किया था। शनिदेव के ऐसे व्यवहार से प्रसन्न होकर सूर्यदेव ने उस दिन उन्हें नया घर दिया जिसका नाम था मकर। इसके बाद से ही शनिदेव दो राशियों कुंभ और मकर के स्वामी हो गए। शनिदेव के इस व्यवहार से प्रसन्न होकर सूर्यदेव ने उन्हें यह भी कहा कि जब भी वह मकर संक्रांति के मौके पर उनके घर आएंगे तो उनका घर धन धान्य से भर जाएगा। उनके पास किसी भी वस्तु की कमी नहीं रहेगी। साथ ही यह भी कहा कि इस दिन जो लोग भी मकर संक्रांति के मौके पर मुझे काले तिल आर्पित करेंगे उनके जीवन में सुख समृद्धि आएगी। इसलिए मकर संक्रांति के मौके पर सूर्य देव की पूजा में काले तिल का इस्तेमाल करने से व्यक्ति के घर में धन धान्य की कोई कमी नहीं रहती है।


डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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